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तूर्यनाद'19 एक राष्ट्र-स्तरीय हिन्दी महोत्सव

उद्देश्य - राजभाषा हिन्दी व भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार द्वारा देशवासियों में राष्ट्रगौरव व आत्मगौरव की भावना का विकास करना।

तूर्यनाद के बारे में !

तूर्यनाद एक राष्ट्र-स्तरीय हिन्दी महोत्सव है, जिसका उद्देश्य राजभाषा हिन्दी व भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार द्वारा देशवासियों में राष्ट्रगौरव व आत्मगौरव की भावना का विकास करना है। इसके अंतर्गत सितम्बर माह को हिन्दी माह के रूप में मनाते हुए महाविद्यालयीन विद्यार्थियों हेतु अनेक राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिताएँ, कार्यशालाएँ, कवि सम्मेलन आदि कार्यक्रम आयोजित होते हैं। तूर्यनाद हिन्दी का औपचारिकता से परे जीवन में सम्मान के साथ उपयोग व प्रचार-प्रसार करने का सन्देश देता है। देश भर से विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने गत 7 वर्षों से तूर्यनाद में आशातीत प्रतिभागिता दर्ज करा आयोजकों को सबल किया है। तूर्यनाद'19 भी इसी उत्साह के साथ आप सभी के योगदान की अपेक्षा करता है।

चित्र प्रदर्शनी

चित्र प्रदर्शनी

तूर्यनाद द्वारा आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ

झलकियाँ

तूर्यनाद द्वारा आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ

कवि सम्मेलन

मध्यम सक्सेना जी की प्रस्तुति

समूह नृत्य

NRI कॉलेज भोपाल की प्रस्तुति

नुक्कड़ नाटक

माखनलाल विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुति

परिधानिका "स्वदेशी फैशन शो"

मैनिट भोपाल की प्रस्तुति

मातृभाषा

मातृभाषा का महत्व

शिक्षा के विभिन्न आयोगों एवं देश के महापुरूषों ने भी मातृभाषा में शिक्षा होनी चाहिए, ऐसे सुझाव दिये हैं।

यदि विज्ञान को जन-सुलभ बनाना है तो मातृभाषा के माध्यम से विज्ञान की शिक्षा दी जानी चाहिए।

कवि रविन्द्र नाथ ठाकुर

विदेशी माध्यम ने बच्चों की तंत्रिकाओं पर भार डाला है, उन्हें रट्टू बनाया है, वह सृजन के लायक नहीं रहे।

महात्मा गांधी

मैं अच्छा वैज्ञानिक इसलिए बना, क्योंकि मैंने गणित और विज्ञान की शिक्षा मातृभाषा में प्राप्त की (धरमपेठ कॉलेज नागपुर)।

पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर अब्दुल कलाम