सुमित्रानन्दन पन्त

सुमित्रानन्दन पन्त

1900-1977

प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानन्दन पन्त छायावादी युग के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। इनके बचपन का नाम गोसाईं दत्त था और उनका जन्म 20 मई 1900 को उत्तराखंड में अल्मोड़ा जिले के कौसानी गांव में हुआ था। आजीवन अविवाहित रहते हुए भी पन्त जी की कविताओं में नारी के शील एवं सौंदर्य का वर्णन मिलता है। पन्त की रचनाओं में अनन्य प्रेम, कल्पना और सौम्यता का पर्क मिलता है। पन्त सन् 1968 में उनके काव्य संग्रह 'चिदम्बरा' के लिए उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार, सन् 1960 में 'काला और बूढ़ा चाँद' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा सन् 1961 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।