सुभद्रा कुमारी चौहान

सुभद्रा कुमारी चौहान

1904-1948

राष्ट्रीय चेतना की सजग कवयित्री व राष्ट्रीय वसंत की प्रथम कोकिला सुभद्रा कुमारी चौहान ने मात्र कविता के क्षेत्र में ही अपना परचम नहीं लहराया अपितु एक उत्कृष्ट कथाकार के रूप में भी श्रेष्ठ प्रतिमान स्थापित किया है। उन्होंने वीर रस से ओत-प्रोत साहित्य-सृजन के साथ शृंगार रस, भक्ति रस व वात्सल्य रस से प्रेरित बाल कविताओं की भी रचना की है।
गाँधी जी के असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाली इस प्रथम महिला सेनानी ने अपनी कृतियों, उदाहरणार्थ- 'उन्मादिनी', 'कल्याणी', 'भग्नावशेष', 'दृष्टिकोण', 'पवित्र ईर्ष्या', इत्यादि में स्त्री-विमर्श को बड़ी मार्मिकता के साथ रेखांकित किया है। सुभद्रा कुमारी चौहान की नायिकाएँ स्वतंत्रता नहीं स्वराज्य चाहती हैं, वे परतंत्रता के बंधन को तोड़ स्वानुशासन में रहना चाहती हैं।
उनकी कालजयी कविता 'झाँसी की रानी' महिला सशक्तिकरण का सिंहनाद थी एवं जिसने लाखों भारतीय युवाओं के हृदयों में उत्साह भरकर उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में स्वयं को झोंक देने के लिए प्रेरित किया था। समस्त तूर्यनाद परिवार इस महान रचनाकार व स्वतंत्रता सेनानी को सादर नमन करती है।