रविन्द्र नाथ टैगोर

रविन्द्र नाथ टैगोर

1861-1941

"विपदाओं से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं
केवल इतना हो करुणामय
कभी न विपदा में पाऊँ भय।
दुख-ताप से व्यथित चित्त को न दो सान्त्वना नहीं सही
पर इतना होवे करूणामय
दुख को मैं कर सकूँ सदा जय।
कोई कहीं सहायक न मिले
तो अपना बल पौरुष न हिले;
हानि उठानी पड़े जगत् में लाभ अगर वंचना रही
तो भी मन में ना मानूँ क्षय।।"
-रवीन्द्रनाथ टैगोर
वसुधैव कुटुम्बकम का नारा देकर पूरे विश्व में एकता और भाईचारे की भावना को प्रसारित करने वाले, एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार से सम्मानित गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर एकमात्र ऐसे कवि हैं जिन्होंने दो देशों का राष्ट्रगान लिखा है।
1905 के बंग विभाजन के बाद विरोध में हुए आंदोलन में आपकी भूमिका अतुलनीय रही थी। 'धर्म के आधार' पर विभाजन को रोकने तथा अंग्रेजों की 'बांटो और राज करो' की नीति को असफल बनाने के लिए आपके प्रयासों ने स्वतंत्रता की क्रांति को एक नई दिशा प्रदान की थी।
''एकला चलो रे' का संदेश देने वाले, आधुनिक भारत के असाधारण सृजनशील कलाकार, समाजसेवी, शिक्षाविद रवीन्द्रनाथ टैगोर जी को तूर्यनाद परिवार शत-शत नमन करता है।