संसदीय वाद-विवाद



तूर्यनाद'16

हिंदी के महायज्ञ ‘तूर्यनाद’ के माध्यम से हिन्दी को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से एवं छात्रों में तार्किक एवं वक्तव्य क्षमता के विकास के लिए इस वर्ष तूर्यनाद’16 में ‘अखिल भारतीय संसदीय वाद विवाद’ का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता तीन चरणों में संपन्न हुई। किसी भी महाविद्यालय के छात्र-छात्राएँ समूह के रूप में इस प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर सकते थे। संसदीय वाद-विवाद प्रतियोगिता भारत के किसी स्थान में होने वाले एशियाई संसदीय वाद-विवाद का प्रथम हिंदी संस्करण था। प्रथम चरण में प्रतिभागी समूहों को 3 विषयों पर वाद-विवाद करना था। प्रत्येक समूह में चार वक्ता थे जिन्होंने अधिनिर्णायक, मुख्य प्रवक्ता, प्रवक्ता व सचेतक की भूमिका निभाई। किसी एक वाद-विवाद में दोनों समूहों को मिलकर एक विषय का चयन करना होता था एवं आपस में सहमति से पक्ष और विपक्ष में वार्ता करनी होती थी। सहमति न बन पाने की स्थिति में टॉस किया जाता था। मुख्य प्रवक्ता का कार्य चयनित विषय को स्पष्ट करना व उसके पक्ष या विपक्ष में तर्क रखना था। प्रवक्ता, मुख्य प्रवक्ता द्वारा दिए गए तर्कों को और अधिक मजबूती से रखता था एवं विपक्ष के मुख्य प्रवक्ता और प्रवक्ता के वक्तव्यों की अप्रत्यक्ष रूप से आलोचना कर सकता था। सचेतक का कार्य प्रवक्ता की बातों को दृढ़ता से रखते हुए अपने पक्ष के विषय या मत को शत-प्रतिशत सत्य सिद्ध करना था। अधिनिर्णायक का कार्य दोनों पक्षों द्वारा दिए गए तर्कों को संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत करके निष्पक्ष रूप से अपना निर्णय सुनाना था। द्वितीय चरण के लिए 4 प्रतिभागी समूहों का चयन वरीयता के आधार पर किया गया। द्वितीय चरण में प्रतिभागी समूहों ने प्रस्तुति दी। प्रतियोगिता का अंतिम चरण डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार, मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल में आयोजित किया था। प्रतियोगिता की कुल ईनामी राशि ₹ 20000 थी।

तूर्यनाद'15

तर्कयुद्ध का अर्थ है -किसी विषय पर दो विभिन्न व्यक्तियों द्वारा पक्ष या विपक्ष में अपने मत प्रस्तुत करना। इतिहास साक्षी है कि किसी विषय पर सही निर्णय लेने हेतु बुद्धिजीवियों द्वारा उस विषय पर शास्त्रार्थ करना एक प्रसिद्ध तकनीक रही है। विद्यार्थियों के मध्य इस प्रतियोगिता के माध्यम से उनकी तार्किक विश्लेषण की क्षमता का विकास करना ही आयोजन का मुख्य उद्देश्य था। तर्कयुद्ध की इस प्रतियोगिता का आयोजन 2 चरणों में किया गया था।प्रथम चरण में विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से किसी दिये गए विषय पर (पक्ष या विपक्ष) में अपने विचार प्रस्तुत करने थे।प्रथम चरण में विद्यार्थियों की विषय समझकर उस पर विश्लेषण क्षमता और वाचन क्षमता अर्थात् अपनी बात को दृढ़ता से प्रस्तुत करने की क्षमता के आधार पर शीर्ष 10 विद्यार्थियों का चयन किया गया। द्वितीय चरण में 2 विद्यार्थियों को 1 विषय पर पक्ष एवं विपक्ष की भूमिका निभानी थी और अपना मत रखना था। प्रतियोगिता का अंतिम चरण डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार, मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल में आयोजित किया था। प्रतियोगिता की कुल ईनामी राशि ₹10000 थी।

तूर्यनाद'14

वाद-विवाद, तार्किक तर्क की तुलना में तर्क का एक व्यापक रूप है, जिसमें व्यक्ति तार्किक स्थिरता, तथ्यात्मक सटीकता वाक्पटुता और दर्शकों के साथ कुछ हद तक भावनात्मक जुड़ाव के साथ अनुनय की अपील करता है। प्रतियोगिता 2 चरणों में आयोजित की गई। भारत के किसी भी महाविद्यालय के छात्र-छात्राएँ इसमें प्रतिभाग कर सकते थे। प्रथम चरण में प्रतिभागियों को प्रदत्त विषय पर अपना 3 मिनट का चलचित्र (वीडियो) बनाकर भेजने के लिए कहा गया जिसमें से शीर्ष 16 प्रतिभगियों का चयन द्वितीय चरण में किया गया जिन्हें प्रतिस्पर्धा हेतु संस्थान में आमंत्रित किया गया। द्वितीय चरण में शीर्ष 16 प्रतिभागियों को 8 समूहों में विभाजित कर उनके मध्य वाद-विवाद कराया गया एवं निर्णायक महोदय ने प्रतिभागियों के ज्ञान, वाक्पटुता, भाव-भंगिमा के आधार पर शीर्ष 3 प्रतिभागियों का चयन किया गया। द्वितीय चरण डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार, मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल में आयोजित किया था। प्रतियोगिता की कुल ईनामी राशि ₹ 20000 थी।

तूर्यनाद'13

सदियाँ गवाह हैं कि समर के वक्त मनुष्य अपनी क्षमता का सर्वाधिक उपयोग करता है और जीत का लोभ मनुष्य के सामर्थ्य को दोगुना कर देता है। यदि किसी विषय पर बिलकुल सही राय प्राप्त करनी हो तो बुद्धिजीवियों के मध्य वाद-विवाद की प्रतियोगिता होनी चाहिए ताकि वे अपनी सम्पूर्ण विचार-विमर्शता उस विषय पर लगाकर एक सही निर्णय पर पहुँच पायें और इसी उद्येश्य के साथ शुरू की गयी वाद-विवाद प्रतियोगिता। इस प्रतियोगिता का आयोजन 2 चरणों में किया गया। प्रथम चरण में विभिन्न संस्थानों के 500 से भी अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया और तात्कालिक भाषण के माध्यम से अंतिम चरण के लिए प्रतिभागियों का चयन किया गया। अंतिम चरण में पहुँचे प्रतिभागियों 2-2 के समूह में विभाजित किया गया तथा एक विषय दिया गया जिसमें दोनों प्रतिभागियों को पक्ष व विपक्ष की भूमिका निभानी थीऔर अपना मत रखना था। कुल 8 समूहों में से 4 समूहों को चयन किया गया और पुनः वही प्रक्रिया दोहराई गयी और अंतिम चरण में 2 समूहों के मध्य वाद-विवाद हुआ और 4 अंतिम प्रतिभागियों में से 3 विजेताओं का चयन किया गया। प्रतियोगिता की कुल पुरस्कार राशि ₹28,000 रही।





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