नुक्कड़ नाटक



तूर्यनाद'16

तूर्यनाद’16 में अखिल भारतीय नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य युवा वर्ग को समाज के ज्वलंत मुद्दों के प्रति न केवल जागरुक बनाना बल्कि उनको इन समस्याओं के प्रति कर्मठ, जवाबदेह व कर्तव्यपरायण बनाना है। प्रतियोगिता दो चरणों में संपन्न हुई। भारत के सभी महाविद्यालयीन छात्र-छात्राएँ समूह में इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते थे। प्रतियोगिता का प्रथम चरण ऑनलाइन चरण था जिसके अंतर्गत नुक्कड़ समूहों से उनके द्वारा ही निर्मित व अभिनित नुक्कड़ का न्यूनतम पाँच मिनट का चलचित्र(अपकमव) आवेदन के रूप में माँगा गया। उसके आधार पर शीर्ष 15 समूहों का चुनाव अंतिम चरण के लिए किया गया। चयनित समूहों द्वारा अंतिम चरण में अपने नुक्कड़ की प्रस्तुति दी गयी। अंतिम चरण मौ. आ. रा. प्रौ. सं., भोपाल के प्रांगण में आयोजित किया गया। प्रतियोगिता की कुल ईनामी राशि ₹20000 थी।

तूर्यनाद'15

‘नुक्कड़ नाटक’ प्रचीन काल से ही अपनी बात को समाज के सामने सरल व रोचक अंदाज में प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम रहा है। नाट्य प्रस्तुति का यह रूप जनता से सीधा संवाद स्थापित करता है। इसमें दृश्य परिवर्तन नहीं होता है बल्कि कलाकार विभिन्न संकेतों के माध्यम से इसकी सूचना देते हैं। इसके माध्यम से विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को प्रभावी तरीके से आम जनता के मध्य प्रस्तुत किया जा सकता है। अतः दर्शकों के सामने विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को उठाने तथा उनका समाधान ढूँढने के उद्देश्य से तूर्यनाद’15 के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता दो चरणों में संपन्न हुई।भारत के सभी महाविद्यालयीन छात्र-छात्राएँ समूह में इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते थे। प्रतियोगिता का प्रथम चरण ऑनलाइन चरण था जिसके अंतर्गत नुक्कड़ समूहों से उनके द्वारा ही निर्मित व अभिनित नुक्कड़ का न्यूनतम पाँच मिनट का चलचित्र आवेदन के रूप में माँगा गया। उसके आधार पर शीर्ष समूहों का चुनाव अंतिम चरण के लिए किया गया। चयनित समूहों द्वारा अंतिम चरण में अपने नुक्कड़ की प्रस्तुति दी गयी। अंतिम चरण मौ. आ. रा. प्रौ. सं., भोपाल के प्रांगण में आयोगित किया गया। प्रतियोगिता की कुल ईनामी राशि ₹20000 थी।

तूर्यनाद'14

किसी ने कहा “सिर्फ अंदाज-ए-बयाँ ही पूरी बात बदल देता है, नहीं तो दुनिया में कोई बात नयी नहीं है”। समाज के कुछ अनछुए मुद्दों को, ऐसे ही अपने ही अंदाज में, लोंगों तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है नुक्कड़ नाटक। प्रतियोगिता दो चरणों में संपन्न हुई। भारत के सभी महाविद्यालयीन छात्र-छात्राएँ समूह में इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते थे। प्रतियोगिता का प्रथम चरण ऑनलाइन चरण था जिसके अंतर्गत नुक्कड़ समूहों से उनके द्वारा ही निर्मित व अभिनित नुक्कड़ का न्यूनतम पाँच मिनट का चलचित्र(अपकमव) आवेदन के रूप में माँगा गया। उसके आधार पर शीर्ष 10 समूहों का चुनाव अंतिम चरण के लिए किया गया। चयनित समूहों द्वारा अंतिम चरण में अपने नुक्कड़ की प्रस्तुति दी गयी। अंतिम चरण मौ. आ. रा. प्रौ. सं., भोपाल के प्रांगण में आयोगित किया गया। प्रतियोगिता की कुल ईनामी राशि ₹20000 थी।





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