चक्रव्यूह

तूर्यनाद'16

चक्रव्यूह ‘ट्रेजर हंट’ की तर्ज़ पर एक मनोरंजक प्रतियोगिता थी। प्रतियोगिता में एक ही चरण का आयोजन किया गया, जिसमें संस्थान में स्थित विभिन्न स्थानों पर आधारित पहेलियों को भेद कर प्रतिभागियों ने अपनी कड़ी मेहनत, दृढ़ता, और सामान्य सूझ-बूझ को प्रदर्शित किया। प्रतियोगिता के अंतर्गत भारत के किसी भी महाविद्यालय के छात्र, दो के समूह में प्रतिभाग कर सकते थे। प्रतियोगिता में प्रत्येक समूह को शुरुआती पड़ाव में अगले पड़ाव से सम्बन्धित पहेली दी गई जिसको बूझकर प्रतिभागी उस पड़ाव में पहुँचकर उसके अगले पड़ाव के लिए पहेली प्राप्त करता था और इसी क्रम में सभी पड़ावों को पार कर अंतिम आठवें पड़ाव में सर्वप्रथम पहुँचने वाले समूह को विजेता घोषित किया गया। प्रतियोगिता की कुल ईनामी राशि ₹6000 थी।

तूर्यनाद'15

जिस प्रकार महाभारत में विभिन्न व्यूहों का निर्माण कर योद्धाओं के रण-कौशल की परीक्षा ली जाती थी, उसी प्रकार विद्यार्थियों के हिंदी ज्ञान और त्वरित निर्णय लेने का क्षमता के आंकलन के उद्देश्य से तूर्यनाद’15 के अंतर्गत चक्रव्यूह की रचना की गई। प्रतियोगिता 3 चरणों में संपन्न हुई। ‘चक्रव्यूह’ प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को 2-2 समूहों में विभाजित किया गया। प्रतियोगिता का प्रथम चरण महाविद्यालय के मुख्य भवन के प्रांगण (पोर्च) से शुरु किया गया। अगले चरण में प्रवेश हेतु विद्यार्थियों को एक-एक संकेत दिया गया, जिसे हल करके प्रतिभागियों को नए स्थान तक पहुँचना था। प्रत्येक नए गंतव्य पर प्रतिभागियों को पिछले संकेत का सही स्पष्टीकरण देने पर ही नया संकेत प्रदान किया गया, साथ ही कुछ मनोरंजक खेलों का आयोजन भी किया गया था। प्रतियोगिता के तृतीय चरण में वरीयता के आधार पर 95 दलों को प्रवेश मिला, अन्य दलों को निर्धारित समय सीमा में संकेत हल न कर पाने के कारण बाहर का रास्ता देखना पड़ा। अंतिम चरण के लिए 95 में से 30 दलों को संकेत प्रदान किया गया जो कि निर्णायक था। प्रतियोगिता की कुल पुरस्कार राशि ₹6000 थी।

तूर्यनाद'13

तूर्यनाद’13 के अंतिम दिन 29 सितम्बर को ‘चक्रव्यूह’ की रचना की गयी। चक्रव्यूह का उद्येश्य केवल अभिरुचि और योग्यता का परीक्षण करना ही नहीं, बल्कि सामान्य हिंदी ज्ञान का भी परीक्षण करना था। विभिन्न महाविद्यालयों से लगभग 300 छात्रों ने अपनी प्रतिभागिता दर्ज करायी। चक्रव्यूह के प्रथम चरण की शुरुआत डॉ. राधाकृष्णन सभागार से हुई। अगले चरण तक पहुँचने के लिए सभी दलों को एक-एक सुराग दिया गया। अगले चरण में पहुँचने पर प्रत्येक दल को पिछले चरण से मिले संकेतों का स्पष्टीकरण सही रूप से देने पर ही अगला संकेत प्रदान किया गया। प्रतियोगिता के किसी भी चरण में अतिरिक्त संकेत प्राप्त करने का अवसर भी सभी दलों को दिया गया जिसे वे प्रतियोगिता के आरम्भ में दिए गए टोकन जमा कर प्राप्त कर सकते थे। प्रतिभागिता दर्ज कराने वाले 98 लोगों में से 33 दलों को निर्धारित समय सीमा में तीसरा चरण पार न कर सकने के कारण प्रतियोगिता से बाहर का रास्ता देखना पड़ा। चौथे चरण में चक्रव्यूह की जटिलता थोड़ी और बढ़ाई गयी और अपनी क्षमता के बल पर उच्च्तम 20 दलों ने निर्धारित सीमा में अंतिम चरण में प्रवेश किया। अंतिम चरण में पहुँचने वाले सभी दलों को छिपे हुए खज़ाने एवं चक्रव्यूह प्रतियोगिता का अंतिम सुराग दिया गया। दिए गए संकेतों के आधार पर चक्रव्यूह भेदने वाले सर्वप्रथम दल को ₹3000 की पुरस्कार राशि प्रदान की गयी।



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